Raavi voice # सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया द्वारा बासमती उत्पादकों के लिए 50 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजे की मांग

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रावी न्यूज अमृतसर

पूर्व मंत्री सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने आज माझा हलके में ‘बासमती’ उत्पादकों के लिए जिनकी फसल कुछ दिन पहले ओलावृष्टि से बर्बाद हो गई, 50 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से तत्काल मुआवजे की मांग की।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि एक दर्जन से अधिक गांवों में बासमती की फसल पूरी तरह नष्ट हो जाने के बावजूद कांग्रेस सरकार ने नुकसान का सर्वेक्षण तक नही कराया। ‘‘इसका मुख्य कारण यह है कि माझा बेल्ट के कांग्रेसी आंतरिक  कलह में व्यस्त हैं,  इस तथ्य के बावजूद कि हमारे पास माझा क्षेत्र के छह मंत्री हैं, जिनमें दो उपमुख्यमंत्री शामिल हैं’’।

उन्होने कहा कि ‘बासमती’ उगाने वाले किसानों को 50 हजार रूपये प्रति एकड़ की दर से मुआवजा दिया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि दोनों जमीन मालिकों के साथ साथ जिन्होने पटटे पर जमीन ली है, उन्हे मुआवजा दिया जाना चाहिए।

सरदार मजीठिया ने कहा कि बासमती की फसल जब तब खराब हो गई जब वह कटाई के लिए तैयार थी। ‘‘ इसके कारण अनाज ओलावृष्टि से खराब हो गया तथा फसल कटाई के कगार पर थी। ‘‘  इस कारण अनाज ओलावृष्टि से तबाह हो गया और वहां कुछ भी नही बचा है’’।

उन्होने  किसानों को तत्काल मुआवजा देने का आहवाहन करते हुए उन्होने कहा कि किसान पहले ही मंहगा पटटा, डीजल और डीएपी खाद की उंची दर होने के कारण पहले ही बहुत परेशान थे।उन्होने कहा कि डीएपी उर्वरकों की अनियंत्रित कालाबाजारी के कारण यह साल उनके लिए बेहद जटिल हो गया।

 उन्होने कहा कि किसान बेपरवाह सरकार के कारण बेहद परेशान हैं , जिसने केवल वादे ही किए हैं। ‘‘जिन किसानों की फसल पहले ही खराब हो गई थी, उन्हे गिरदावरी के बाद भी मुआवजा नही मिला है। यहां तक कि जिस किसान को मुख्यमंत्री चरनजीत सिंह चन्नी ने गुलाबी सुंडी के हमले से कपास की फसल खराब हाने के बाद व्यक्तिगत रूप से सांत्वना दी थी, उसे भी कोई मुआवजा नही मिला है’’।

यह बताते हुए कि कांग्रेस के कार्यकाल में लोगों के मुददों के बारे में कोई कार्रवाई ही नही होती कहते हुए  अकाली नेता ने मुख्यमंत्री से पूर्व मुख्यमंत्री सरदार परकाश सिंह बादल द्वारा निर्धारित उदाहरण का अनुकरण करने को कहा। उन्होने कहा कि जब कपास की फसल को कीटों के कारण नुकसान हुआ था, तब तत्कालीन अकाली दल के नेतृत्व वाली सरकार  ने किसानों के साथ साथ खेत मजदूरों को मुआवजा दिया था। ‘‘ अब किसानों को इसकी जरूरत हैं, क्योंकि कपास की फसल के तबाही के कारण खेती मजदूरों ने अपनी आजीविका खो दी है’’।

सरदार मजीठिया ने कहा कि कांग्रेस सरकार पूरा कर्ज माफ करने में नाकाम रही है। ‘‘ यहां तक कि खेत आत्महत्या पीड़ित परिवारों को वादा, मुआवजा यां नौकरी नही दी गई। अब सरकार अपना कर्तव्य पूरा करने में विफल रही है, सरकार क्षतिग्रस्त फसल का शीघ्र मुआवजा सुनिश्चित करने में नाकाम रही है। उन्होने कहा कि इससे ज्यादा किसान विरोधी क्या हो सकता है’’ ।

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