Raavi News # युवा चित्रकार करण बाजवा ने अपनी पेंटिंग प्रदर्शनी ‘ब्लैक विबग्योर’ के जरिए बहुआयामी भावनाओं को किया पेश

गुरदासपुर आसपास दुनिया

रावी न्यूज गुरदासपुर

एक युवा आर्किटेक्ट एवं चित्रकार करण बाजवा अपनी पहली और एकल प्रदर्शनी ‘ब्लैक विबग्योर’ में भावनाओं के विभिन्न रूपों का शानदार मेल प्रस्तुत करती 50 पेंटिंग्स प्रदर्शित करेंगे। करण कारगिल के शहीद मेजर बीएस बाजवा, सेना मेडल (वीरता) के सुपुत्र हैं और उनकी पेंटिंग्स का संग्रह पंजाब कला भवन, सेक्टर 16 में कला प्रेमियों के लिए उपलब्ध रहेगा।  “15 जनवरी सेना दिवस है, जो फील्ड मार्शल के एम करियप्पा के भारतीय सेना के पहले कमांडर-इन-चीफ के रूप में पदभार ग्रहण करने की याद में मनाया जाता है। मैंने भारतीय सेना के सम्मान के प्रतीक इस सेना दिवस पर अपनी प्रदर्शनी शुरू करने का निर्णय लिया है, ” करण ने  बात करते हुए कहा। करणदीप बाजवा के साथ उनकी मां राजविंदर बाजवा, डिप्टी कमिश्नर स्टेट टैक्स, पंजाब सरकार, और उनके अंकल- कर्नल पीएस बाजवा, डिप्टी डायरेक्टर डिफेंस, पंजाब सरकार, आज्ञापाल सिंह रंधावा, प्रोडक्शन प्रोड्यूसर – डायरेक्टर, डीडी जालंधर तथा ग्रुप कैप्टन पीएस लांबा भी मौजूद थे। करण ने कहा, “इस कला प्रदर्शनी को ‘ब्लैक विबग्योर’ नाम दिया गया है, क्योंकि एक साल की अवधि में तैयार मेरी ये कलाकृतियां लोगों की गहरी भावनाओं को दर्शाती हैं। ये उनके चेहरे पर नजर नहीं आती हैं और इस खूबसूरत प्रकृति में हर प्राणी के बीच संतुलन स्थापित करती हैं।”पोर्टइलस्ट्रेटिज्म नामक एक नये कला रूप के बारे में बात करते हुए, जिसका उपयोग इन चित्रों में किया गया है, करण ने कहा: “यह एक चित्र के गहन, अवधारणात्मक चित्रण को प्रकट करने के लिए तैयार की गयी कला का एक रूप है। इसका आधुनिक कला आंदोलनों और कला के विभिन्न आगामी रुझानों पर व्यापक प्रभाव पड़ता है।” करण बाजवा के चित्रों का विषय प्राणियों की गहरी भावनाएं हैं। कलाकार खुद को एक ऑब्जर्वर के रूप में देखता है और उसकी विस्तृत छवियां ज्यामितीय रूपों के माध्यम से जीवन की भावनाओं को दर्ज करती हैं, जो देखने वाले को पता नहीं चलतीं, लेकिन उसको नजर आती हैं जो दिमाग के विभिन्न आयामों से चित्रों को देखता है।

कैनवास पर चारकोल और एक्रिलिक में काम करते हुए, वह इंद्रधनुष के सात रंगों का उपयोग करते हैं, जो उनके चित्रों को एक मजबूतउपस्थिति प्रदान करते हैं। उनके चित्रों में आकृति रूपों को प्रस्तुत करने की उनकी कुशलता और अनुपात को समझने में माहिर उनकी तेज नजर साफ दिखाई देती है। “मैं चेतन मन से परे पहुंचने की कोशिश करता हूं,” चंडीगढ़ में रहने और काम करने वाले करण आगे कहते हैं, “मेरी पेंटिंग्स में यह सब दिखता है।” प्रदर्शनी में दो पेंटिंग ऐसी भी होंगी जो करण के पिता को समर्पित हैं। “ये दो पेंटिंग मेरे पिताजी से प्रेरित हैं। उन्हें यह मेरी विनम्र श्रद्धांजलि है।”

Share and Enjoy !

Shares

Leave a Reply

Your email address will not be published.