Raavi News # कृषि मंत्री रणदीप सिंह नाभा द्वारा डी.ए.पी. संकट से निपटने के लिए केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री मनसुख मांडवीया के साथ मुलाकात

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कृषि मंत्री के दख़ल के बाद मांडवीया ने 3-4 दिनों में पंजाब में डीएपी की सप्लाई देने का दिया भरोसा, तीनों काले कृषि कानूनों को रद्द करवाने की भी की मांग

चंडीगढ़/ नई दिल्ली (गुरविंदर सिंह मोहाली)

पंजाब में डीएपी संकट के मद्देनजऱ राज्य के कृषि, किसान कल्याण और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री रणदीप सिंह नाभा के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री मनसुख मांडविया ने आज पंजाब को तीन-चार दिनों के अंदर डीएपी (डाईअमोनियम फॉस्फेट) के 10 रेक, एनपीके (कॉम्पलेक्स उर्वरक) के 5 रेक और एसएसपी (सिंगल सुपर फॉस्फेट) के 2 रेक सप्लाई करने का भरोसा दिया। पंजाब की माँग को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय मंत्री ने आने वाले महीनों नवंबर और दिसंबर में पंजाब को यूरिया की उचित सप्लाई देने का भरोसा भी दिया।

श्री मांडविया के साथ आज उनके कार्यालय में मुलाकात करते हुए कृषि मंत्री ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि रबी फसलों के लिए कुल 5.50 लाख मीट्रिक टन डीएपी की ज़रूरत है, जिसमें से अक्तूबर और नवंबर में गेहूँ की फ़सल की समय से बुवाई के लिए 4.80 लाख मीट्रिक टन डीएपी की ज़रूरत होती है जिससे गेहूँ की अधिक से अधिक पैदावार को यकीनी बनाया जा सके। बताने योग्य है कि पंजाब में लगभग 35.00 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूँ बोया जाता है।

पंजाब के कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य के पास पिछले साल (01.10.2020) के 3.63 एलएमटी के मुकाबले 01.10.2021 को डीएपी का 0.74 लाख मीट्रिक टन ओपनिंग स्टॉक ही उपलब्ध है। भारत सरकार ने अक्तूबर -2021 दौरान 2.75 एलएमटी की माँग के विरुद्ध सिर्फ़ 1.97 लाख मीट्रिक टन डीएपी ही अलॉट किया है। यह महसूस किया जा रहा है कि गेहूँ की फ़सल की बुवाई के लिए इस महत्वपूर्ण उर्वरक की कमी है और गेहूँ की बुवाई के लिए सिर्फ़ 20-25 दिन बाकी रह गए हैं। श्री नाभा ने कहा कि पंजाब ने अक्तूबर-2021 के लिए राज्य को 1.50 एलएमटी डीएपी की अतिरिक्त अलॉटमेंट सम्बन्धी माँग भी की है और डीएपी की सप्लाई में तेज़ी लाई है।

अक्तूबर 2021 के महीने के लिए केंद्र सरकार की सप्लाई योजना और वास्तविक डिस्पैच संबंधी जानकारी देते हुए श्री. नाभा ने बताया कि पंजाब को 197250 मीट्रिक टन की अलॉटमेंट योजना के विरुद्ध सिर्फ़ 80951 डीएपी प्राप्त हुआ, इस तरह कुल अलॉटमेंट का सिर्फ़ 41 फीसदी ही प्राप्त हुआ जबकि हरियाणा को कुल अलॉटमेंट का 89 फीसदी (सप्लाई योजना 58650, भेजा गया 52155), यूपी को 170 फीसदी (सप्लाई योजना 60000 भेजा गया 102201) और राजस्थान को 88 फीसदी (सप्लाई योजना 67890 भेजा 59936) प्राप्त हुआ जो कि केंद्र सरकार द्वारा पंजाब के साथ सौतेले व्यवहार को दर्शाता है।

‘‘हमने केंद्रीय मंत्री को बताया कि देश के अन्नदाता के तौर पर जाने जाते पंजाब को उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुकाबले डीएपी की बहुत कम मात्रा अलॉट की जा रही है। हम इस संवेदनशील मुद्दे पर पिछले छह महीनों से केंद्र सरकार को लिख रहे हैं। हमने केंद्रीय मंत्री को यह भी बताया कि रबी सजीन शुरू होने वाला है और ऐसे समय में डीएपी की कमी किसानों की बेचैनी का कारण बन सकती है। श्री नाभा ने आशा अभिव्यक्ति कि केंद्र द्वारा पंजाब को डीएपी की उचित सप्लाई देने की वचनबद्धता पूरी की जायेगी। मीटिंग के बाद पत्रकारों के साथ बातचीत करते हुए पंजाब के कैबिनेट मंत्री ने यह भी खुलासा किया कि केंद्रीय मंत्री ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय मंडी में उर्वरक की अनुपस्थिति के कारण ही डीएपी की कमी पैदा हुई है और केंद्र सरकार जल्द ही पंजाब को डीएपी की अपेक्षित सप्लाई यकीनी बनाएगी।

मीटिंग दौरान हमने यह भी माँग की कि केंद्र सरकार काले कृषि कानूनों को रद्द करे जिसके लिए किसान पिछले एक साल से विरोध कर रहे हैं। नाभा ने कहा कि किसान असुरक्षित महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनकी दलील है कि इन कृषि कानूनों से बड़े कॉर्पाेरेट घराने उनकी कृषि भूमि को छीन लेंगे। नरमे की फ़सल पर गुलाबी सूंडी के हमले वाले मुद्दे पर पूछे जाने पर मंत्री ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने पहले ही किसानों को मुआवज़ा देने का वादा किया है। उन्होंने यह भी बताया कि भविष्य में नरमे की फ़सल को इस तरह के हमलों से बचाने के लिए राज्य द्वारा प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. मार्कंडेय के साथ मिलकर नवीनतम ट्यूब तकनीक अपनाई जा रही है। मीटिंग में वित्तीय आयुक्त (विकास) श्री डी.के. तिवारी और निदेशक (कृषि) डॉ. सुखदेव सिंह भी मौजूद थे।

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