भारतीय सेना के गौरव व देशवासियों के प्रेरणास्रोत हैं मेजर बाजवा जैसे जांबाज-कर्नल शेखावत

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रावी न्यूज गुरदासपुर

जम्मू-कश्मीर के कुलहामा क्षेत्र में पाक प्रशिक्षित आतंकियों से लड़ते हुए शहादत का जाम पीने वाले सेना की 313 फील्ड रेजीमेंट (34 आर.आर) के सेना मेडल विजेता मेजर बलविंदर सिंह बाजवा का 22वां श्रद्धांजलि समारोह शहीद के नाम पर बने स्थानीय पार्क में शहीद मेजर बाजवा की पत्नी आबकारी विभाग की कमिश्नर राजविंदर कौर बाजवा की अध्यक्षता में आयोजित किया गया। जिसमें 19 गार्ड यूनिट के कमांडिंग अफसर कर्नल बी.आर शेखावत बतौर मुख्य मेहमान शामिल हुए। इनके अलावा  शहीद के चाचा होम गार्ड के पूर्व जिला कमांडेट हरदीप सिंह बाजवा, सास जसबीर कौर, शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंदर सिंह विक्की, मेजर आयुष गुंदरा, सूबेदार मेजर भूपिंदर चंद, नगर कौंसल के प्रधान एडवोकेट बलजीत सिंह पाहड़ा, व्यापार मंडल व कांग्रेस के जिला प्रधान दर्शन महाजन, डी.पी.आर.ओ हरजिंदर सिंह कलसी, सीनियर सिटीजन क्लब के प्रधान फ्लाइंग अफसर दर्शन सिंह आदि ने विशेष तौर पर शामिल होकर शहीद मेजर बी.एस बाजवा को श्रद्धांजलि अर्पित की। सर्वप्रथम शहीद की पत्नी कमिश्नर राजविंदर कौर बाजवा, कर्नल बी.आर शेखावत  व अन्य मेहमानों ने शहीद की प्रतिमा को माल्यार्पण व रीथ चढ़ाकर कार्यक्रम का आगाज किया तथा सेना के जवानों ने बिगुल की गौरवशाली धुन के साथ शहीद को नमन किया।

श्रद्धांजलि सामरोह को संबोधित करते हुए मुख्यातिथि  कर्नल बी.आर शेखावत ने कहा कि शहीद मेजर बलविंदर सिंह बाजवा जैसे जांबाज भारतीय सेना के गौरव हैं, ऐसे शूरवीरों का बलिदान समूह देशवासियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। उन्होंने कहा कि मेजर बाजवा ने जम्मू-कश्मीर में आतंकियों से लड़ते हुए जिस वीरता व अदम्य साहस का परिचय दिया उसकी मिसाल बहुत कम देखने को मिलती है। ऐसे वीर योद्धा के अमर बलिदान से हमारे जवान हमेशा प्रेरणा लेते रहेंगे। उन्होंने कहा की भारतीय सेना हमेशा शहीद परिवारों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि हर शहर वासी का यह फर्ज बनता है की शहीद की याद में बने इस पार्क की साफ सफाई का ध्यान रखें।

शहादत का दर्द असहनीय मगर गर्व है बलिदान पर-कमिश्नर बाजवा

शहीद की पत्नी कमिश्नर राजविंदर कौर बाजवा ने कहा कि जिस घर का चिराग देश की बलिवेदी पर कुर्बान हो जाता है, उस परिवार के लिए जहां उसकी शहादत का दर्द असहनीय होता है, वहीं समूचे परिवार को उसके बलिदान पर गर्व भी होता है। उन्होंने कहा कि उनके पति संत रुप व जमीन से जुड़ी हुई शख्सियत थे। आज वो जिस भी मुकाम तक पहुंची है उसके पीछे उनके शहीद पति की प्रेरणा है जिन्होंने अपना बलिदान देकर बाजवा परिवार का नाम सारे देश में रोशन किया।

दुख है आज भी लोग शहीद के पार्क को फिश पार्क के नाम से जानते हैं-

शहीद की पत्नी कमिश्नर राजविंदर कौर बाजवा ने कहा कि बेशक इस पार्क में उनके शहीद पति की प्रतिमा लगी है मगर फिर भी लोग इस पार्क को उसके पुराने नाम फिश पार्क के नाम से जानते हैं। जिससे उनकी भावनाएं आहत होती हैं। इस लिए सरकार व प्रशासन को चाहिए कि कुछ ऐसा प्रयास करे कि लोग इस पार्क के पुराने नाम को भूलकर इसे एक शहीदी पार्क के नाम से जाने।

सरहद पर सैनिक जागता है, तभी देश चैन से सोता है-कुंवर विक्की

कुंवर रविंदर सिंह विक्की ने कहा कि देश का सैनिक कठिन परिस्थितियों में डयूटी निभाते हुए सरहद पर रात भर जागता है ताकि देशवासी चैन की नींद सो सकें। इस लिए देशवासियों को भी चाहिए कि देश के वीर सैनिकों व उनके परिजनों को उचित मान-सम्मान देकर उनकी शहादत की गरिमा को बहाल रखें,  क्योंकि यह हैं तो देश है, इनकी बदौलत ही राष्ट्र की एकता व अखंडता बरकरार है। उन्होंने कहा की मेजर बाजवा की शहादत के बाद उनके पिता इकबाल सिंह ने अपनी बहू राजविंदर कौर के सर पर पगड़ी रखते हुए कहा था कि आज के बाद वो ही उनका बेटा है और शहीद की पत्नी राजविंदर कौर ने भी इस फर्ज को बाखूबी निभाते हुए समस्त बाजवा परिवार को एकता के सूत्र में बांधे रखा, इनके त्याग व समर्पण के समक्ष वह नतमस्तक हैं।

जसपिंदर ने शहीद को समर्पित किया गोल्ड मेडल

आबकारी विभाग में ए. एस.आई जसपिंदर सिंह बाजवा जो कि राष्ट्र स्तर के खिलाड़ी हैं, तथा पिछले दिनों जब उनका चयन बैंगलोर में 100 मीटर हरडल रेस के लिए हुआ तो उन्होंने शहीद मेजर बाजवा की प्रतिमा के समक्ष ये प्रण किया कि अगर उन्हें इस मुकाबले में गोल्ड मेडल मिला तो वह उसे मेजर बाजवा को समर्पित करेगा और उनके आशीर्वाद से उस मुकाबले में उन्होंने स्वर्ण पदक जीता इसलिए आज वो इस  गोल्ड मेडल को मेजर बाजवा की प्रतिमा को पहना कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।  इस मौके पर सुखविंदर कौर गौराया, जी.ओ .जी टीम की ओर से कैप्टन तरलोक सिंह, सूबेदार मेजर सुखविंदर सिंह, सूबेदार मेजर मंजीत सिंह, नायब सूबेदार जोगिंदर सिंह, हवलदार सतनाम सिंह, हवलदार रघुबीर सिंह, रुपिंदर सिंह,  जिला रक्षा सेवाएं भलाई विभाग के तरफ से सूबेदार सकत्तर सिंह, अश्वनी सिंह, हवलदार सुखदेव सिंह आदि उपस्थित थे।

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