दरबार श्री पिंडोरी धाम में श्री योगीराज भगवान जी की जयंती पर समारोह आयोजित

धर्म

रावी न्यूज गुरदासपुर (संदीप)

दरबार श्री पिण्डोरी धाम के संस्थापक एवं प्रथमाचार्य श्री योगीराज भगवान जी महाराज जी की जयंती दरबार श्री पिण्डोरी धाम में वर्तमान द्वाराचार्य श्री महंत रघुबीर दास जी महाराज जी की अध्यक्षता में बड़ी धूमधाम से मनाई गई। महाराज जी द्वारा सुबह पूजा अर्चना की गई। इसके बाद सत्संग एवं भजनों द्वारा महाराज जी ने संगतो को भरपूर आशीर्वाद दिया। उन्होंने अपने प्रवचनों में श्री योगीराज भगवान जी महाराज जी की जीवनी के बारे में बताया कि माता श्रीमति मैना देवी एवं पिता तोता राम जी खजूरिया उपजाति के ब्राह्मण गुरदासपुर के समीप काहनूवाल में विक्रमी सम्वत 1550 के चैत्र मास कृष्ण पक्ष, चतुर्थी तिथि, मंगलवार पूर्वा फालगुनी नक्षत्र मीन लग्न में प्रात  काल राज्यों के राजा आचार्य के आचार्य हिंदु संस्कृति के सरक्षंक और आर्य जाति के शिरोधार्य श्री भगवान जी का अवतार हुआ। जब बालक 12 दिन के हुए तो इनका नाम करण संस्कार योगी तारा नाथ जी द्वारा किया गया। उन्होंने इनका नाम भगवान जी रखा और उन्होंने बताया कि यह भगवान नारायण जी का अवतार है इसलिए इनका नाम भगवान जी रखा। बचपन से ही यह बहुत योग लीलाए करते रहते। जैसे एक बार शक्कर को रेत में और रेत को शक्कर में बदल दिया, भेड़ियों को कान से पकड़ना। फकीर शाह बहराम का लौटा भगवान श्री महाराज जी के चरणों में आ गिरा। इनके हर समय मुख में राम राम और वीणा पर उगुंलियां चलती रहती। महाराज जी ने अपने प्रवचनों में कहा कि भगवान जी का नाम और सिमरन हर समय करना चाहिए इससे मन को शांति एवं सुख मिलता है। मनुष्य को अपने कर्मों के हिसाब से फल मिलता है इसलिए मनुष्य को अच्छे कर्म करने चाहिए और किसी से भी ईष्या, द्वेष ओर व्यर्थ में दुख नहीं देना चाहिए। विपति आने पर भी धर्म से पीछे नहीं हटना चाएि। धर्म के चार चरण (पग) है। सत्य, दया, तप, दान हमें इन चारों पगों पर ही चलना चाहिए। इसके बाद महाराज जी ने भजनों द्वारा संगत को भरपूर आशीर्वाद दिया। बाद में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया और आये हुए सभी संत महात्माओं को दान दक्षिणा एवं वस्त्र दिये गए।

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