सात दिन तक जीवन और मौत से संघर्ष करने वाले अजविंदर ने तोड़ा दम, मामूली झगड़े के कारण गई नाबालिग की जान

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रावी न्यूज़ दीनानगर दीनानगर पुलिस ने नाबालिक बच्चे की मौत के मामले में एक अज्ञात सहित पांच लोगों पर किया मामला दर्ज। अजविंदर की मौत की खबर सुनते ही पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई। पीड़ित परिवार ने की इंसाफ की मांग। मृतक अजविंदर सिंह के पीड़ित पिता जसविंदर सिंह पुत्र अजैब सिंह निवासी गांव मलूक मटम ने बताया कि उसके दो बच्चे है। बड़ी लडक़ी नवरोज कौर और छोटा लडक़ा अजविंदर सिंह। दोनों दीनानगर के एक निजी स्कूल में पढ़ते है। 22 अप्रैल को उसका बेटा अजविंदर सिंह रोजाना की तरह सुबह पढऩे के लिए अपने स्कूल अपनी स्कूटरी पर सवार होकर गया था। दोपगर ढ़ाई बजे किसी दुकानदार ने गांव अवांखा से फोन किया कि आपका बेटे का खजूरिया सीमेंट स्टोर बहरामपुर रोड दीनानगर के पास एक्सीडेंट हो गया है। जब वह मोपेड पर सवार होकर जब जकडिय़ा पुल पर पहुंचा तो उन्हें फिर से फोन आया कि उनके बेटे को सिविल अस्पताल सिंघोवाल दीनानगर इलाज के लिए ले गए है। जब वह अस्पताल पहुंचे तो उनका बेटा दाखिल नहीं था। उन्हें फिर से फोन करके पूछा तो बताया गया कि आपका बेटा सिविल अस्पताल गुरदासपुर ले गए है। सिविल अस्पताल में पहुंचा तो अपने बेटे को मिले। जिसकी हालत बेहद गंभीर थी। हालत गंभीर होने के कारण अपने बेटे को गुरदासपुर के एक निजी अस्पताल में दाखिल करवाा। जहां पर डा. ने बताया कि उनके बेटे के सिर में गंभीर चोट लगी है। इसका आप्रेशन करना पड़ेगा। इस अस्पताल से भी अपने बेेटे को उसी दिन अमृतसर के निजी अस्पताल में दाखिल करवा दिया। जिसकी इलाज दौरान मौत हो गई। मृतक के पिता ने कहा कि उसने अपने स्तर पर छानबीन की तो पता चला कि 22 अप्रैल को जब उसका बेटा अजविंदर सिंह स्कूल से दोपहर के वक्त छुट्टी हुई तो उसने अपनी स्कूटरी सब्जी मंडी अवाखां में लगाई हुई थी। क्योंकि स्कूल प्रबंधको द्वारा बच्चों को मोटरसाकिल व अन्य व्हीकल पर स्कूल आने पर मनाही करते थे। उनका बेटा जब छुट्टी के बाद स्कूटरी लेने के लिए सब्जी मंडी अवांखा आया तो वहां पर पहले से मौजूद स्कूली विद्यार्थियों के साथ उनके बेटे की मामूली तकरार हुई थी। उस समय उनका बेटा बीच बचाव कर अपनी स्कूटरी पर गांव को चल पड़ा। जब उनका बेटा खजूरिया सीमेंट स्टोर बहरामपुर रोड़ दीनानगर के पास पहुंचा तो पीछे से उक्त स्कूली विद्यार्थी मोटरसाइकिल पर सवार होकर आए और उनके बेटे के सिर में किसी ने लोहे का राड मारा है। जिससे उनका बेटा स्कूटरी से नीचे गिर गया। जबकि उक्त सभी मोटरसाइकिल पर मौके से फरार हो गए। राहगीरों ने उनके बेटे को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। जब उनका बेटा 22 अप्रैल को गुरदासपुर के निजी अस्पताल में दाखिल था, तो वहां सरवन सिंह और एक अन्य व्यक्ति अस्पताल आए थे। इसके बाद भी सरवन सिंह व इसके साथ अन्य व्यक्ति अमृतसर अस्पताल आते रहे और उसे परेशान करते रहे।

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