बाबा नानक का 534वां विवाह पर्व 13 सितंबर को, तैयारियां शुरू

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रावी न्यूज

बटाला : जगतगुरु श्री गुरु नानक देव जी का 534वां विवाह पर्व 13 सितंबर को पूरी श्रद्धा और हर्षोल्लास से सभी शहरवासियों की ओर से मनाया जा रहा है। वैश्विक महामारी के चलते बटाला के इतिहास में पहली बार पिछले वर्ष प्रथम पातशाही का विवाह पर्व लाकडाउन के चलते प्रशासन द्वारा अनुमति ना मिलने के कारण पूरे रीति-रिवाजों के अनुसार आयोजित नहीं किया जा सका था, लेकिन इस बार इस महान पर्व के पूरे शानो शौकत से मनाए जाने की पूरी उम्मीद है। इसके लिए एसजीपीसी की ओर से अभी से ही तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।

विवाह पर्व को लेकर गुरुद्वारा साहिब श्री कंध साहब के मैनेजर गुरतिरदर पाल सिंह भाटिया से बात की गई तो उन्होंने बताया कि विवाह पर होने वाले सुरक्षा और अन्य प्रबंधों को लेकर एसडीएम बलविदर सिंह और डीसी मोहम्मद इशफाक को एसजीपीसी की ओर से एक सप्ताह पूर्व मेल भेजकर सूचित कर दिया गया था। जल्द ही प्रशासन का जवाब मिलने की संभावना है। विवाह पर्व मनाने संबंधी एसजीपीसी की तैयारियों के बारे में भाटिया ने बताया कि 11 सितंबर को गुरुद्वारा साहिब में रखे गए अखंड पाठों का भोग पड़ने के बाद परंपरा के अनुसार शगुन लगाने के लिए एक जत्था पांच प्यारों की अगुवाई में सुल्तानपुर लोधी के लिए रवाना होगा। 12 सितंबर को अगले दिन नगर कीर्तन के रूप में वापसी कर विभिन्न शहरों और कस्बों में रुकता हुआ गुरुद्वारा साहिब डेरा साहिब में आकर संपन्न होगा। 13 सितंबर को युगो- युगो अटल श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया और पांच प्यारों की अगुवाई में सुबह 8 बजे विवाह रूपी नगर कीर्तन की शुरुआत होगी, जो शहर के तयशुदा रूट और गुरुद्वारा श्री सतकरतारियां से होता हुआ देर रात्रि को गुरुद्वारा साहिब श्री कंध साहिब पहुंचेगा। इसी बीच एसएसपी दफ्तर के बाहर रवायत मुताबिक पुलिस की एक टुकड़ी की ओर से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी को सलामी भी दी जाएगी। गुरुद्वारा साहिब कंध साहिब का इतिहास

534 वर्ष पूर्व जब सुल्तानपुर लोधी से प्रथम पातशाही श्री गुरु नानक देव जी की बरात परिवारिक सदस्यों जिनमें पिता श्री मेहता कालू राय, माता तृप्ता देवी, बहन नानकी तथा अन्य बारातियों सहित बटाला में पहुंची तो ससुराल पक्ष माता सुलखनी देवी की सहेलियों की ओर से हंसी मजाक में बहनोई श्री गुरु नानक सहिब को घर के निकट ही स्थित छोटे से टीले पर बनी कच्ची दीवार के समीप बिठा दिया गया, ताकि वह दीवार दूल्हे के ऊपर गिर जाए। लड़कियों की इस नीयत का जब वहां पर विराजमान एक बुजुर्ग माता को पता चला तो उन्होंने तुरंत ही दूल्हा बने गुरु नानक साहिब को कच्ची दीवार से दूर हट कर बैठने और इसके किसी भी समय गिरने बारे अवगत कराया तो श्री गुरु नानक देव जी ने रहती दुनिया तक इस दीवार के बने रहने की भविष्यवाणी की। लगभग साढ़े पांच सो वर्ष पुरानी यह दीवार श्री गुरु नानक साहिब की गई भविष्यवाणी का जीता जागता सबूत है। कुछ वर्षो पूर्व जब श्रद्धालु इस दीवार की मिट्टी उखाड़ कर अपने घरों को ले जाने लगे तो शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की ओर से इसे शीशे की फ्रेमिग कर संजो लिया गया।

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