प्राचीन ऐतिहासिक स्थान दोमुँहा में शिवरात्रि तथा बैसाखी पर लगता है विशाल मेला

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शिवरात्रि के उपलक्ष्य पर प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्थल  दोमुंहा में एक विशाल  मेला लगाया गया जहां पर आस पास के गांवों के हजारों लोग नतमस्तक होने के लिए पहुंचे। इस अवसर पर जानकारी देते हुए मन्दिर के भक्त तरुण वर्मा तथा सुरिन्दर कुमार ने बताया कि यह एक  बहुत ही प्राचीन एवं  ऐतिहासिक स्थान है इस अवसर पर विशेष तौर पर जानकारी देते हुए गांव के सुरिंदर पाल जहां पर पिछले लम्बे समय से प्रभु शिव की आराधना की जाती है यही नहीं बैसाखी पर भी यहां पर एक विशाल मेला लगाया जाता है।

मन्दिर का इतिहास

मन्दिर के इतिहास के बारे में जानकारी देते हुए सुरिन्दर कुमार उर्फ शिंदा तथा तरुण वर्मा ने बताया कि यहां पर 2 इच्छाधारी नाग तथा नागिन भाई बहन की कहानी प्रचलित है ।बताया जाता है कि सपेरों का एक झुंड अपनी बीन के बल से इच्छाधारी नाग को पिटारे में बंद करके लेकर चले गए जिस पर सांप की बहन इच्छाधारी नागिन ने मानव भेष में रोते हुए एक गुज्जर जोकि सिद्धू मीर शम्ब में अपनी भैंसे चरवा रहा था को आग्रह किया कि वह उसके भाई जिसे सपेरों द्वारा अपने पिटारे में डाला गया है को वापिस ला दे तो वह उसकी मुंह मांगी मुराद पूरी करेगी जिस पर गुज्जर ने कहा कि अगर वह उन सपेरों के पीछे जाएगा तो उसकी भैंसे कौन चराएगा जिस पर इच्छाधारी नागिन ने कहा उसकी भेैंसे खेतों से कहीं नहीं जाएंगी। गुर्जर उन सपेरों ढूंढते हुए उस पैरों के पास पहुंचा तथा उनके पास बैठकर बातचीत करने लगा जिस पर सपेरों ने गुर्जर को बताया कि उन्होंने एक इच्छाधारी सांप को पकड़ा है तथा इसका वजन बहुत अधिक है उनसे उठाया नहीं जा रहा। थोड़ी देर बाद जब सपेरे कुछ दूर गए तो गुज्जर ने शाम को बताया कि उसे उनकी बहन द्वारा भेजा गया है तथा वह नागमणि भी दिखाई जोकि पहचान के लिए भेजी गई थी। जिस पर सांप ने गुजर से कहा कि जब वह इस पिटारे को स्पर्श करेगा तो उसका वजन फूलों के समान हो जाएगा लेकिन जब कोई अन्य व्यक्ति इस पिटारे को हाथ लगाएगा तो उसके लिए ये वजन बहुत भारी होगा। सपेरे गुर्जर की शक्ति को देख उसको साथ लेकर लाहौर की ओर चल पड़े लेकिन रास्ते में एक पानी का नाला था जिसे पार करने के बाद सपेरे  दूसरी ओर चले गए लेकिन जैसे ही गुर्जर नाले को पार करने लगा तो नाले में पानी आ गया जिस कारण वह वहीं खड़ा रह गया सपेरों के बुलाने पर उन्होंने कहा जब नाले का पानी उतरेगा तो वह उस तरफ आ जाएगा इसी दौरान सांप ने गुर्जर को कहा कि वह उसका पिटारा खोले जिस पर गुर्जर ने पिटारा खोला तो इच्छाधारी सांप ने अपना  विकराल रूप धारण कर लिया तथा गुर्जर को अपनी पीठ पर बिठाकर जिस तरफ से गुजरता गया धरती उसे रास्ता देती गई तथा  इच्छाधारी सांप अपनी बहन से  दोमुंहा नामक इसी स्थान पर आके मिले तथा यह वचन किए कि जो भी बहन यहां पर आकर अपने भाई की मुराद मांगेगी उसे भाई मिलेगा तब से यहां पर बहनें अपने भाइयों को मांगने के लिए नतमस्तक होती है तथा उनकी मुरादें पूरी होती हैं। सुरिंदर कुमार उर्फ शिंदा संचालक दोमुंहा ने आगे बताया कि इसके अतिरिक्त जिन बच्चों को सोकड़ा जैसी बीमारियां होती हैं वे भी यहां पर आकर 5 रविवार स्नान करने के बाद ठीक हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि इस स्थान पर शिवरात्रि तथा बैसाखी पर भारी मेले लगते हैं तथा हजारों की संख्या में लोग यहां पर नतमस्तक होने के लिए पहुंचते हैं । इस अवसर पर विशेष तौर पर बिहार से गुरु जी दर्शनों हेतु पहुंचे उनके साथ ओमप्रकाश रवि वर्मा मोनिका केतन वर्मा मयंक वर्मा आदि मौजूद थे ।

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